लखनऊ गजट . वाल्यूम 37 पेज 73 का हिन्दी अनुवाद
लेखक.एच0आर0 नेबेल ;आई0सी0एस0

…………………तत्पश्चात 29903 की संख्या में राजपूतों का आगमन हुआ। वे मुख्यकर लखनऊ तहसील में पाये जाते हैं व तुलनात्मक रूप से मोहनलालगंज में कम है। वे अभी भी जिले के सबसे बड़े भूस्वामी हैं और पिछले बंदोबस्त के समय उनके पास 214407 एकड़ की अधिकृत सम्पत्ति थी। करीब.करीब समस्त मोहाना व आधा मलिहाबाद बिजनौर उनका निजी है। राजपूत ताल्लुकदारों ने न केवल अपनी स्थिति संभाली बल्कि उसमें अक्सर सुधार किया है परन्तु उनके समकक्ष समूहों ने प्रत्येक क्षेत्र में अत्यधिक पीड़ा सही। सन् 1866 से ही उन्होनंे केवल मलिहाबाद में करीब 14000 एकड़ व बिजनौर में 18000 एकड़ से अधिक भूमि से हाथ धो लिया। राजपूतों के अनेको सबसे अधिक समीपियों में चैहान हैं जिनमें से अधिकतर बिजनौर व पश्चिम परगना के जैसवार हैं। जैसवार सबसे अधिक संख्या में उत्तर में हैं और उक्त संख्या में इटौंजा और मोहाना के बड़े.बड़े ताल्लकुदार सम्मिलित हैं। वहाँ छह ;6द्ध वैस ताल्लुकदार हैं जिनके पास जिले में जमीन है परन्तु उनमें से कोई भी लखनऊ में वास नहीं करता। जैसवार में सबसे महत्वपूर्ण है पुरसेन के ताल्लुकदार लोग जो मोहनलालगंज परगना में स्थित हैं। वहाँ पर अन्य वंश के केवल एक ही ताल्लुकदार है और वह हैं विरसेनपुर कुनीहरवा रायबरेली के अमेठी राजा। इन वंशों के योग में जिनका हवाला दिया गया है बहुत से अन्य और हैं जिनका अच्छा प्रतिनिधित्व इस जिले में है। इनमें मुख्यकर जैसवार हैं जो सूबे के अन्य भागों से इस भाग में सबसे अधिक संख्या में हैं………………….